एक-नेक हरियाणवी!
धर्म-कर्म का पालना, गीता का उपदेश ! सच में हरि का वास है, हरियाणा परदेश !!
अमन-चैन की ये धरा, है वेदों का ज्ञान ! भूमि है ये वीर की, रखें देश की आन !!
हट्टे-कट्टे लोग हैं, अलग-अलग है भेष,पर हरियाणा एक है, न कोई राग द्वेष !!
कुरुक्षेत्र की ये धरा, करें कर्म निर्वाह !पानीपत मैदान है, ऐतिहासिक गवाह !!
चप्पे-चप्पे है यहाँ, बलिदानी उपदेश,आंदोलन का गढ़ यही, जिससे भारत देश !!
मर्द युद्धों को पलटते, पदक जीतती बीर !एक-नेक हरियाणवी, सिखलाते हैं धीर !!
मेल-जोल त्योहार में, गीतों का परिवेश,मानवता का पालना, गाये प्रेम सन्देश !!
माथे इसके सरस्वती, कहते वेद विशेष !सच में हरि का वास है, हरियाणा परदेश !!
डॉo सत्यवान सौरभ,
रिसर्च स्कॉलर, कवि,स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार, आकाशवाणी एवं टीवी पेनालिस्ट,333, परी वाटिका, कौशल्या भवन, बड़वा (सिवानी) भिवानी, हरियाणा – 127045

Author: Jarnail
Jarnail Singh 9138203233 editor.gajabharyananews@gmail.com