देश में स्किल्ड युवाओं की फोर्स तैयार करने के मकसद से राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप इंसेंटिव योजना की शुरुआत की गई। इसके तहत प्रशिक्षुओं को आर्थिक सहायता भी दी जाती है, जिसे राष्ट्रीय प्रशिक्षुता प्रोत्साहन योजना भी कहा जाता है। ऐसे में कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय ने प्रशिक्षुओं को सीधे तौर पर आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए डीबीटी योजना की शुरुआत की है।
पहले क्या था नियम
राष्ट्रीय प्रशिक्षुता प्रोत्साहन योजना (एनएपीएस) प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) कार्यक्रम का एक हिस्सा होगी, जो सभी प्रशिक्षुओं को सीधे तौर पर सरकारी आर्थिक सहायता प्रदान करेगी। इससे पहले कंपनियां प्रशिक्षुओं को पूरी राशि का भुगतान करती थी और फिर सरकार से उसके लिए प्रतिपूर्ति की मांग करती थीं। सरकार डीबीटी योजना के शुभारंभ के साथ ही राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) के माध्यम से प्रशिक्षुओं के बैंक खातों में अपना योगदान सीधे स्थानांतरित कर देगी, जो छात्रवृत्ति का 25% यानि कि प्रति माह 1500 रुपये तक देय होगा।
स्किल इंडिया मिशन को बढ़ावा
केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि स्किल इंडिया के तहत अप्रेंटिसशिप को काफी बढ़ावा मिल रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षुओं के पहले समूह के लिए राष्ट्रीय प्रशिक्षुता प्रोत्साहन योजना के तहत डीबीटी के माध्यम से सब्सिडी की आर्थिक सहायता उनके खातों में पहुंच चुकी है। इससे न केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम को बढ़ावा मिलता है बल्कि यह कदम हमें स्किल इंडिया की क्षमता को शीघ्र साकार करने के और करीब भी ले जाता है।
भारत के युवाओं को कौशल युक्त, पुन:
कौशल से पूर्ण और अधिकतम कौशल (Skilled, re-skilled and up skilled) युक्त बनाने, प्रति व्यक्ति आर्थिक उत्पादन बढ़ाने तथा राष्ट्रीय अभियानों में उनका सहयोग प्राप्त करने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम अनिवार्य है। यह न केवल उम्मीदवारों के समक्ष वास्तविक समय के औद्योगिक वातावरण को उजागर करता है बल्कि उन्हें प्रशिक्षण के दौरान भी अर्थव्यवस्था में योगदान करने का अवसर देता है। इससे सरकार, व्यवसायों और शैक्षिक प्रणालियों के सहयोग से स्थायी कौशल विकास रणनीति बनाकर स्किल इंडिया मिशन को भी बढ़ावा मिलता है। कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय का उद्देश्य कौशल विकास के इस तरह के स्थायी मॉडल के माध्यम से युवाओं की रोजगार क्षमता को और बढ़ावा देना तथा पीएम मोदी के आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को साकार करने में मदद करना है।
कब हुई योजना की शुरुआत
राष्ट्रीय शिक्षुता प्रशिक्षण योजना केंद्र सरकार की एक कौशल ट्रेनिंग स्कीम है। इसके तहत छात्रों को सरकारी, निजी संस्थानों में कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाता रहा है। देश में अप्रेंटिसशिप व ट्रेनिंग कार्यक्रमों को बढ़ावा देने और ट्रेनिंग देने वाले प्रतिष्ठानों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए 19 अगस्त, 2016 को राष्ट्रीय प्रशिक्षुता प्रोत्साहन योजना (एनएपीएस) शुरू की गई थी। इस कार्यक्रम का उद्देश्य नियोक्ताओं को अप्रेंटिसशिप को नियुक्त करने के लिए प्रेरित करना और गहन कौशल विकास के माध्यम से उनकी क्षमताओं को अधिकतम करते हुए सही नौकरी की भूमिका खोजने में सहायता करना है। अब तक, 12 लाख से अधिक प्रशिक्षु विभिन्न उद्योगों से जुड़ चुके हैं।
भारत एक कुशल कार्यबल के निर्माण के उद्देश्य से विभिन्न प्रशिक्षुता सुधारों की शुरुआत के साथ ‘विश्व की कौशल राजधानी’ बनने का सपना पूरा होने की राह पर है। माना जा रहा है कि आने वाले वर्षों में इन योजनाओं को और बढ़ाया जाएगा तथा सभी अनुबंध डीबीटी अनुबंध होंगे।

Author: Jarnail
Jarnail Singh 9138203233 editor.gajabharyananews@gmail.com