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August 31, 2025 1:13 AM

बालिका पंचायत : जानें क्या है, जहां महिलाएं ही बनती हैं सरपंच

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अक्सर हम सबने ग्रामीण अंचलों में देखा होगा या सुना होगा कि किसी गांव की सरपंच भले ही महिला है, लेकिन महिला सरपंच की पंचायत के तमाम काम-काज उनके पति या पिता द्वारा किये जाते हैं। इससे साफ है कि महिलाओं को भागीदारी तो, मिल रही है, लेकिन शासन करने की व्यवस्था में वे अभी भी स्वतंत्र नहीं हैं। इसे लेकर कई तरह के सवाल भी उठते हैं, इन सारे प्रश्नों के निराकरण के लिए गुजरात में अनूठी पहल की शुरुआत हुई है।

दरअसल, गुजरात के कच्छ जिले में देश की पहली बालिका पंचायत की शुरुआत हुई है। इस पहल का उद्देश्य लड़कियों के सामाजिक और राजनीतिक विकास को बढ़ावा देना और राजनीति में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की जल्द ही पूरे देश में बालिका पंचायत की शुरू करने की योजना है। आइए जानते हैं बालिका पंचायत के बारे में विस्तार से…

क्या है बालिका पंचायत

दरअसल, गुजरात के कच्छ जिले पांच गांव को मिलाकर बालिका पंचायत का आगाज हुआ है। दिलचस्प बात ये है कि इस पंचायत की जिम्मेदारी कोई महिला या कॉलेज जाने वाली लड़की नहीं बल्कि 11 से 21 साल की उम्र की बालिकाओं द्वारा संभाली जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य बालिकाओं को सामाजिक और राजनीतिक विकास को बढ़ावा देना और समाज में मौजूद कुरीतियों को दूर कर उनकी समस्याओं का समाधान करना है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत महिला एवं बाल विकास कल्याण गुजरात सरकार की अनोखी पहल है। इस “बालिका पंचायत” की सरपंच 20 वर्षीय उर्मि आहिर को बनाया गया है।

बालिका पंचायत में सदस्य का नामांकन
बालिका पंचायत के सदस्यों का चुनाव भी ग्राम पंचायत की तरह ही होता है। सभी पंचों और सदस्यों का चुनाव भी मतदान के आधार पर ही होती है। इसके लिए बालिकाएं रैली निकालकर प्रचार भी करती हैं। इस पहल से बालिकाओं को बचपन से ही पंचायत की निर्णय प्रक्रिया से अवगत कराकर सक्रिय राजनीति में उनकी सहभागिता सुनिश्चित की जा सकेगी।

महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी भी इससे काफी प्रभावित हुई और वो इसे पूरे देश में लागू करने की योजना बना रही हैं। केंद्रीय मंत्री का मानना है कि इससे ग्रामीण परिवेश की महिलाओं में और जागरूकता आएगी।

जाहिर है एक समय महिलाओं की काफी अनदेखी होती थी और उन पर बहुत अत्याचार होते थे। लेकिन अब महिलाओं को हर क्षेत्र में भागीदारी मिलने से इसमें काफी सुधार आया है। हालांकि दूरदराज के गांव में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए अभी काफी प्रयास करने होंगे। बालिका पंचायत उस दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है।

Jarnail
Author: Jarnail

Jarnail Singh 9138203233 editor.gajabharyananews@gmail.com

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