भारत विश्व में डिजिटल भुगतान के मामले में नंबर वन बन चुका है। तभी तो इंडिया डिजिटल भुगतान में लगातार अपनी बढ़त बना रहा है। याद हो, हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित फाइबर सिक्योरिटी से जुड़े एक राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान इसका जिक्र करते केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि डिजिटल इंडिया ने न सिर्फ लोगों का सशक्तिकरण किया है बल्कि उनके जीवन में एक रचनात्मक बदलाव लाने में भी अहम योगदान दिया है।
कैसे बनी डिजिटल भुगतान में भारत की बढ़त ?
वाकई ऐसा देखने को भी मिला है। डिजिटल पेमेंट से पहले के समय को ही जरा याद कर लीजिए। आप अब भी अपने जहन से उन यादों को नहीं मिटा पाए होंगे जब किसी भी पेमेंट के लिए बैंक के चक्कर लगाने पड़ते थे और उस पर से अगर बीच में छुट्टी के दिन बैंक बंद रहने की नौबत आ जाती थी तो सारा काम चौपट होता था सो अलग। उस वक्त को डिजिटल पेमेंट के चलन ने ही बदला है। लोगों ने डिजिटल पेमेंट को अब अपने जीवन में ढाल लिया है। तभी भारत की डिजिटल भुगतान की क्षमता बीते कुछ वर्षों में ही काफी अधिक हो गई है। इससे भारत में एक नया बदलाव आया है और एक ”न्यू इंडिया” उभरकर सामने आया है। यूपीआई सिस्टम के जरिए पिछले वित्त वर्ष के दौरान डिजिटल ट्रांजेक्शन का आंकड़ा 10 खरब अमेरिकी डॉलर को पार कर गया। आज भारत विश्व में डिजिटल भुगतान के मामले में पहले स्थान पर है।
2021 में कुल वैश्विक डिजिटल भुगतान में भारत की हिस्सेदारी 40%
इस बीच ध्यान देने वाली बात यह है कि 2021 में कुल वैश्विक डिजिटल भुगतान में भारत की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत है और यूपीआई है न सिर्फ भारतीय बल्कि वैश्विक एप के रूप में उभर कर सामने आया है। पिछले 5-6 साल की अवधि में भारतीयों ने डिजिटल भुगतान की ओर रुख किया है।
देश की अर्थव्यवस्था को नया रूप देने में बहुत अहम
इस प्रकार यह देश की अर्थव्यवस्था को नया रूप देने में या बड़ा बदलाव लाने में बहुत अहम रहा है। इस पर विशेषज्ञ अपनी राय देते हैं कि पूरे के पूरे फाइनेंशियल सेक्टर में पेमेंट करने का एक दायरा है, उसमें यह एक बड़ा बदलाव लेकर आया है। न केवल भुगतान करने वालों को बल्कि सरकार और एनफोर्समेंट एजेंसी को भी लेकर हर तरीके से इसमें बदलाव देखा गया है।
अर्थव्यवस्था को दी पहले कभी न देखे जाने वाली रफ्तार
जिस रफ्तार से इसका इस्तेमाल बढ़ा है उसे देखकर यही लगता है कि यह पहले कभी न देखे जाने वाली रफ्तार है। इसके इस्तेमाल को लेकर बिलकुल भी उम्मीद नहीं थी कि अचानक से इसका इस्तेमाल इतना बढ़ जाएगा। दरअसल, देखकर यही प्रतीत होता था कि देश में लोग डिजिटल प्रणाली को आसानी से स्वीकार नहीं करेंगे लेकिन आज की तस्वीर देखें तो यह सोच के बिलकुल उलट है। भारत में अब हर कोई डिजिटल पेमेंट करना जानता है।
ट्रेडिशनल कैश पेमेंट सिस्टम को कहा बाय-बाय
लोगों ने ट्रेडिशनल कैश पेमेंट की सिस्टम को छोड़कर डिजिटल पेमेंट को अपनाया और अब बेहद आसानी से कहीं भी और कभी भी किए जाने वाले डिजिटल पेमेंट प्रक्रिया को अपनाया। डिजिटल पेमेंट ने पेमेंट करने का दायरा अब इतना खोल दिया है कि किसी को भी इसे अपनाने और इस्तेमाल करने में जरा भी संकोच नहीं हुआ।
डिजिटल पेमेंट के कौन-कौन से तरीके ?
यदि देखें तो डिजिटल पेमेंट के कौन-कौन से तरीके अपनाए गए हैं तो उसमें यूपीआई, बैंक कार्ड व नॉन स्मार्टफोन का सिस्टम आता है जिससे हम अनस्टकचर्ड सप्लीमेंट्री डेटा के जरिए एक एनालॉग फोन के जरिए भी पेमेंट कर सकते हैं। इन सबके अलावा आधार इनेबल पेमेंट, मोबाइल वॉलेट, बैंक प्रीपेड कार्ड, डेबिट और क्रेडिट कार्ड स्वाइप करने वाले टूल, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग समेत माइक्रो एटीएम तक शुरू हो गए हैं।
लोगों के पास बढ़ी चॉइस
लोगों के पास डिजिटल पेमेंट करने के कई विकल्प आ गए। ऐसे में लोगों को सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि शनिवार और रविवार के दिन बैंकों की छुट्टी होने पर भी अब लोगों की पेमेंट नहीं रुकती। यानि 365 दिन और 24 घंटों के लिए देश में एक ऐसी प्रणाली खुल गई जो किसी भी समय लोगों की सेवा में हाजिर है। ऐसे में पूरा का पूरा सिस्टम जो पहले उधार चलता था इसी वजह से कि आज बैंक बंद है या आज हमारे पास चेक बुक नहीं है या आज बैंक पे ऑर्डर नहीं बना पा रहा है, इस तरह की तमाम रुकावटें खत्म होने से देश में बिजनेस की रफ्तार बढ़ी है। अब पेमेंट जल्दी आने लगी है। ऐसे में कहना गलत नहीं होगा कि डिजिटल पेमेंट ने भारतीय फाइनेंशियल सेक्टर को पूरा का पूरा ट्रांसफॉर्मेशन किया है।

Author: Jarnail
Jarnail Singh 9138203233 editor.gajabharyananews@gmail.com