यशवंत सिन्हा जनता पार्टी के सदस्य के रूप में सक्रिय राजनीति से जुड़ गए और वर्ष 1988 में उन्हें राज्य सभा का सदस्य चुना गया। 1990-91 में वे चंद्रशेखर सरकार में वित्त मंत्री रहे। मार्च 1998 में अटल सरकार में उनको वित्त मंत्री और विदेश मंत्री नियुक्त किया गया। 22 मई 2004 तक संसदीय चुनावों के बाद नई सरकार के गठन तक वे विदेश मंत्री रहे।
फरवरी के आखिरी कार्यदिवस और शाम पांच बजे बजट पेश करने की परंपरा को 1999 में पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने समय बदलकर 11 बजे कर दिया था। उन्हें पेट्रोलियम उपकर के माध्यम से भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के वित्त पोषण को बढ़ावा देने का श्रेय भी दिया जाता है। उन्होंने पूरे भारत में राजमार्गों के निर्माण को आगे बढ़ाने और महत्वाकांक्षी स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना को शुरू करने में मदद की।
करीब तीन दशक तक भाजपा से जुड़े रहने के बाद 2018 में बीजेपी पार्टी छोड़ दी। पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा मार्च 2021 में तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए। हालाकि राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाए जाने से पहले सिन्हा ने तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया था।
उम्मीदवार बनाए जाने पर क्या कहा
यशवंत सिन्हा ने ट्वीट कर कहा, “अब समय आ गया है जब एक बड़े राष्ट्रीय उद्देश्य के लिए मुझे पार्टी से हटकर अधिक विपक्षी एकता के लिए काम करना होगा। मुझे यकीन है कि वह इस कदम को स्वीकार करती है।”
विपक्ष उम्मीदवार से जुड़े रोचक तथ्य
–यशवंत सिन्हा के बेटे जयंत सिन्हा भी सत्तारूढ़ दल के सदस्य हैं। जयंत सिन्हा ने 2014-2019 तक पीएम मोदी की पहली सरकार में केंद्रीय मंत्री के रूप में कार्य किया।
–2015 में, वरिष्ठ राजनेता को फ्रांस सरकार का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार, ऑफिसियर डे ला लीजन ‘होनूर’ मिला।
–राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख शरद पवार भारत के 15वें राष्ट्रपति के लिए विपक्ष की पसंदीदा पसंद थे। हालांकि, उन्होंने विनम्रता से इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया।
–जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला और बंगाल के पूर्व राज्यपाल, महात्मा गांधी के पोते गोपालकृष्ण गांधी ने भी विपक्ष के उम्मीदवार नहीं होने का फैसला किया।

Author: Jarnail
Jarnail Singh 9138203233 editor.gajabharyananews@gmail.com