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February 4, 2026 4:57 AM

बहन कुमारी मायावती: बहुजन नायिका का जन्मदिन – संघर्ष से सत्ता तक की प्रेरक गाथा

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(विशेष जन्मदिन विशेषांक)

15 जनवरी का दिन भारत की राजनीति में एक मील का पत्थर है। इसी दिन बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की संस्थापिका और चार बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रहीं बहन कुमारी मायावती का जन्म हुआ। एक साधारण जाटव परिवार में जन्मीं इस नारी ने जातिगत भेदभाव की जंजीरें तोड़कर लाखों दलितों, पिछड़ों और वंचितों को सशक्तिकरण का मार्ग दिखाया। आज उनके जन्मदिन पर पूरे देश में बहुजन समाज उत्सव मना रहा है। ‘बहन जी’ के नाम से विख्यात मायावती का जीवन संघर्ष, दृढ़ता और विजन का प्रतीक है। जन्मदिन मुबारक हो, बहन जी!कुमारी मायावती का जन्म 15 जनवरी 1956 को उत्तर प्रदेश के बदौली गांव (शामली जिला) में एक साधारण परिवार में हुआ। पिता प्रभु दास रेलवे में टिकट कलेक्टर थे, जबकि मां भी एक सामान्य गृहिणी। बचपन से ही उन्होंने जातिवाद का कड़वा घूंट पीया, लेकिन कांशीराम जी के मार्गदर्शन में राजनीति में प्रवेश किया। 1977 में दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए की डिग्री प्राप्त करने वाली मायावती ने बीएसपी की स्थापना (1984) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कांशीराम जी के निधन के बाद उन्होंने पार्टी की कमान संभाली और उत्तर प्रदेश को ‘बहुजन समाज’ की नई परिभाषा दी।

मायावती का राजनीतिक सफर किसी चमत्कार से कम नहीं। 1989 में हरदोई से पहली बार सांसद बनीं, फिर 1995 से 2007 तक चार बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रहीं। उनका शासनकाल विकास, सुरक्षा और सशक्तिकरण का प्रतीक बना। लखनऊ में बनाई गई ‘अंबेडकर मेमोरियल पार्क’ और नोएडा की ‘दलित प्रेरणा स्थली’ जैसी परियोजनाएं आज पर्यटकों और प्रेरणा स्रोत बन चुकी हैं। उन्होंने ’80-20′ फॉर्मूले से ब्राह्मणों को जोड़कर बीएसपी को मजबूत बनाया। कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति से अपराध दर घटी। गरीबों के लिए मुफ्त बिजली, आवास और शिक्षा योजनाएं उनकी दूरदृष्टि का प्रमाण हैं।बहन जी का बहुजनवाद केवल नारा नहीं, बल्कि क्रांति है।

डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों से प्रेरित होकर उन्होंने दलितों को मुख्यधारा में लाने का बीड़ा उठाया। उत्तर प्रदेश में बने सैकड़ों पार्क, स्मारक और संग्रहालय आज वंचित वर्गों को अपनी पहचान देते हैं। राजनीति में महिलाओं के लिए उन्होंने मिसाल कायम की – एक विधवा महिला के रूप में सत्ता के शीर्ष पर पहुंचकर साबित किया कि इच्छाशक्ति सब कुछ जीत लेती है।

2007 का विधानसभा चुनाव उनकी सबसे बड़ी जीत था, जब बीएसपी ने पूर्ण बहुमत हासिल किया। राष्ट्रीय स्तर पर भी वे राज्यसभा सदस्य रहीं और विपक्ष की मजबूत आवाज बनीं।आजादी के 75 वर्ष बाद भी जब जातिवाद की जड़ें गहरी हैं, बहन मायावती की प्रासंगिकता और बढ़ जाती है। उन्होंने कहा, ‘जाति तो भूल जाओ, अब वोट की राजनीति करो।’ उनका जन्मदिन केवल उत्सव नहीं, बल्कि संकल्प का अवसर है। युवा पीढ़ी को उनके संघर्ष से सीखना चाहिए – शिक्षा लो, संगठित होओ और सत्ता पर कब्जा करो।

जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं!
बहन कुमारी मायावती को कोटि-कोटि नमन। उनके नेतृत्व में बहुजन समाज और मजबूत हो। जय भीम! जय भारत!

Jarnail
Author: Jarnail

Jarnail Singh 9138203233 editor.gajabharyananews@gmail.com

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